history of Shri Guru teg bahadur ji ibook
Shri Guru Teg Bahadur Ji 


श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1621 में हुआ।  श्री गुरु तेग बहादुर जी सिखों के ९वें गुरु हैं, श्री गुरु तेग बहादुर जी की पतनी का नाम गुजरी जी था, श्री गुरु तेग बहादुर जी के घर एक पुत्र हुआ जिसका नाम उन्होंने गोबिंद राय रखा, गोबिंद राय जी ने 13 अप्रैल 1699 को वैसाखी वाले दिन खालसा पंथ की नीव रखी और अपने नाम के साथ सिंह लगाया और सिखों को अपने नाम के पीछे सिंह और लड़कियों को कौर लगाने का आदेश दिया।


जब गोबिंद राय जी 9 वर्ष के थे तो कुछ कश्मीरी पंडित गुरु तेग बहादुर जी के दरबार में आए और उन पर हो रहे अत्याचार के बारे में बताया कि औरंगजेब हिन्दुओं के मंदिरों को नष्ट कर रहा है और जबरन हिन्दुओं को मुस्लिम बना रहा है। तब गुरु जी ने कश्मीरी पंडितों के दुःख को सुन कर कहा कि अगर इस ज़ुल्म को रोकना है तो किसी महानपुरष को क़ुरबानी देनी होगी तब गोबिंद राय जी ने कहा कि पिता जी मुझे आपसे बड़ा महापुरष इस दुनिया में नज़र नहीं आ रहा तो गोबिंद राय की यह बात सुन कर गुरु तेग बहादुर जी ने क़ुरबानी देने का फैसला किया और गोबिंद राय को गुरगदी सौंप कर गुरु जी अपने कुछ सिखों को साथ ले कर दिल्ली गए और हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए क़ुरबानी कर दी। 


श्री तेग बहदुर जी के पुत्र गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरु हुए हैं, श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए क़ुरबानी की और हिन्द की चादर कहलाये।