फरवरी में 28 या 29 दिन क्यों होते हैं, क्यों चार साल बाद लीप year होता है इसको हम दोनों पक्षों से देखेंगे मतलब कि इसकी हिस्ट्री भी देखेंगे और इसके पीछे की साइंस भी देखेंगे, तो पहले हम कैलेंडर के पीछे की हिस्ट्री देख लेते हैं बाद में इसके पीछे की साइंस देखेंगे।
History of Calendar
1 साल में जो 12 महीने होते हैं वो चंद्रमा के Lunar Cycle के According होते हैं।
1st Centaury B.C. में उस वक़्त रोम के कुछ विधवानो ने खेती और अन्य कार्यों को ध्यान में रखते हुए कैलेंडर बनाया, इसे Calendar by Romulus कहते थे। इस कैलेंडर में 10 महीने ही थे और 10 महीनों के हिसाब से इसमें 304 दिन हुआ करते थे। बाकी बचे हुए दिनों का कैलेंडर उन्होंने बनाया ही नहीं क्यूंकि वो समझते थे कि इन दिनों में खेती नहीं होती तो इन दिनों का कैलेंडर बनाने का कोई फायदा नहीं।
उसके बाद जब रोम का नया राजा Numa Pompilius आया और उसने सोचा कि इतने दिनों का कोई हिसाब नहीं यह तो बेवकूफी है फिर चाँद के 12 Lunar Cycle के According कैलेंडर बनाया जिसमें 355 दिन थे।
यह कैलेंडर मार्च से शुरू होता था और मार्च को Martius कहते थे।
वो लोग Even Numbers को सही नहीं मानते थे इसलिए उन्होंने उन्होंने कुछ महीने 29 दिनों के और कुछ महीने 31 दिनों के बनाए।
अब जो दिन बचते थे उनमें से एक महीना Even Numbers में आता था इसलिए उन्होंने एक महीना 28 दिनों का रखा और यह महीना उनके कैलेंडर के लास्ट पर आता था।
अब 355 दिनों के कैलेंडर के हिसाब सा कुछ सालों बाद खेती का सीज़न समय के पहले या समय के बाद आ जाता था।
फिर उन्होंने इस कैलेंडर में एक और महीना Add कर दिया और इस महीने में 27 दिन होते थे, पर इस महीने को Add करने के बाद उनकी टेंशन और बढ़ गई क्युंकि इस कैलेंडर ने उन्हें उनके पुराने 304 दिनों वाले कैलेंडर से भी ज्यादा दुविधा में दाल दिया।
क्युंकि रोम का राजा नुमा पोम्पीलिअस अपना फ़ायदा देख कर कैलेंडर को बदलता रहता था और दिनों को आगे पीछे कर देता था।
यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक रोम का राजा नुमा पोम्पीलिअस रहा।
उसके बाद जब रोम का नया राजा जूलियस सीज़र आया तो उन्होंने किसी विद्वान को कैलेंडर को ठीक करने की ज़िम्मेदारी दी और हुक्म दिया के अब कैलेंडर को चाँद नहीं सूर्य के According बनाया जाए।
उस विद्वान् ने 355 दिनों का कैलेंडर बदल कर 445 दिनों का कर दिया। .
फिर Julius Ceasor ने यह कैलेंडर बंद करवा कर नया 355 - 365 दिनों का कैलेंडर बनवाया और यह कैलेंडर सूर्य के According बनाया गया और जनवरी, फरवरी को आखिर से उठा कर पहले दूसरे स्थान पर कर दिया और फरवरी को 29 दिनों का कर दिया।
उसके बाद फरवरी से एक दिन निकाल कर अगस्त में Add कर दिया और फरवरी को 28 दिनों का कर दिया और यहीं से लीप year की शुरुवात हुई।
लीप Year क्यों होता है
हम सब जानते हैं कि हमारी धरती सूर्य का एक चक्क्रर पूरा करने में 365 दिन 6 घंटे लगाती है अगर ऐसे ही चलता रहे तो इसका हिसाब बिगड़ जाएगा इसलिए इन 6 घंटों को अलग करके चौथे साल में 1 दिन Add कर दिया गया। यह 1 दिन फरवरी में Add कर दिया गया।
इसी वजह से चार साल बाद Leap Year आने लग गया और इसी वजह से फरवरी में 28 या 29 दिन होते हैं।

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